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कुर्मी चेतना रैली के सूत्रधार सतीश कुमार का निधन, बिहार की राजनीति में शोक; बेटे निशांत ने पहुंचकर दी श्रद्धांजलि

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पटना: बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक सतीश कुमार का निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे सतीश कुमार को कुछ समय पहले ब्रेन हेमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई।
सतीश कुमार को बिहार की राजनीति में उस ऐतिहासिक कुर्मी चेतना रैली के आयोजक के रूप में विशेष रूप से याद किया जाता है, जिसने 1990 के दशक में राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पटना के गांधी मैदान में 12 फरवरी 1994 को आयोजित इस विशाल रैली ने उस समय की राजनीति में नई हलचल पैदा की थी और इसके बाद नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर को नई पहचान मिली थी।
पूर्व विधायक के निधन की खबर के बाद कई नेताओं और समर्थकों ने शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके पुत्र निशांत कुमार कंकड़बाग स्थित सतीश कुमार के आवास पहुंचे और पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने सतीश कुमार के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और परिवार को ढांढस बंधाया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सतीश कुमार के निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि अस्थावां और सूर्यगढ़ा के पूर्व विधायक सतीश कुमार का निधन बेहद दुखद है और उनके जाने से राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
सतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और सक्रिय रहा। वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद वर्ष 1995 में उन्होंने नालंदा जिले के अस्थावां विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया। बाद में वे समता पार्टी से भी जुड़े और वर्ष 2001 में विधायक के रूप में सक्रिय रहे।
राजनीतिक जीवन के दौरान उन्होंने कई चुनावी मुकाबलों में हिस्सा लिया। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नालंदा संसदीय क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि वह जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में उनका प्रभाव बना रहा।
सतीश कुमार की पहचान खास तौर पर 1994 में आयोजित कुर्मी चेतना महारैली के कारण बनी। उस समय बिहार की राजनीति में यह रैली एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी। लालू प्रसाद से राजनीतिक दूरी बनने के बाद नीतीश कुमार ने इसी रैली के जरिए अपने राजनीतिक आधार को मजबूत किया था। उस ऐतिहासिक आयोजन ने सतीश कुमार को भी राज्यभर में पहचान दिलाई और उन्हें कुर्मी समाज के एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित किया।
उनके निधन से नालंदा, लखीसराय और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग और उनके समर्थक उन्हें एक सादगीपूर्ण और जमीनी नेता के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के दौरे पर हैं। मंगलवार से उन्होंने ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत की है, जिसके तहत वे कोसी और सीमांचल के कई जिलों का दौरा करेंगे। इसी कारण वह स्वयं अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके परिवार की ओर से निशांत कुमार ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
सतीश कुमार के निधन से बिहार की राजनीति के एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया है, जिसने राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने में कभी अहम भूमिका निभाई थी। उनके जाने से राजनीतिक गलियारों में शोक और स्मृतियों का एक दौर शुरू हो गया है।

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